डॉक्टर हेडगेवार जी का जीवन सन्देश
संघ को समझे संघ से जुड़ें ... डॉक्टर जी का जीवन सन्देश ~~~~~~~~~~~~~~ परमपूजनीय डॉक्टरजी के कष्टपूर्ण, परिश्रमी एवं कर्मठ जीवन से सर्वसाधारण व्यक्ति को एक आशादायी सन्देश मिलता है। दरिद्रता, प्रसिद्धिविहीनता, बड़ों की उदासीनता, परिस्थिति की प्रतिकूलता, पग-पग पर बाधाएँ, विरोध, उपेक्षा, उपहास आदि के कटु अनुभव के साथ-साथ स्वीकृत कार्य की पूर्ति के लिए आवश्यक साधनों का अत्यन्त अभाव आदि कितनी ही कठिनाइयाँ मार्ग में आयें तो भी अपने कार्य के साथ तन्मय होकर ‘मुक्तसंगोऽनहंवादी.....’ इस वृत्ति से सुख-दुख, मानापमान, यशापयश आदि किसी की भी चिन्ता न करते हुए यदि कोई प्रयत्नरत रहेगा तो उसे अवश्य ही सफलता मिलेगी।’’ डॉक्टरजी के छोटे जीवनचिरत्र के आरम्भ में ‘‘क्रियासिद्धिः सत्त्वे भवति महतां पकरणे’’ यह जो सुभाषित दिया है वह उनके ऊपर पूरी तरह घटता है; किंबहुना उनका सम्पूर्ण जीवन ही इस उक्ति का मूर्तिमन्त उदाहरण था। अपने घरबार के कामकाज में हताश होकर हाथ-पाँव छोड़ देनेवालों को, किसी भी सामाजिक कार्य को करते समय बाधाओं से घबड़ाकर निराशा से कार्यविमुख होनेवालों को, इस पवित्र जीवन से आशा का सन...