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डॉक्टर हेडगेवार जी का जीवन सन्देश

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संघ को समझे संघ से जुड़ें ... डॉक्टर जी का जीवन सन्देश ~~~~~~~~~~~~~~ परमपूजनीय डॉक्टरजी के कष्टपूर्ण, परिश्रमी एवं कर्मठ जीवन से सर्वसाधारण व्यक्ति को एक आशादायी सन्देश मिलता है। दरिद्रता, प्रसिद्धिविहीनता, बड़ों की उदासीनता, परिस्थिति की प्रतिकूलता, पग-पग पर बाधाएँ, विरोध, उपेक्षा, उपहास आदि के कटु अनुभव के साथ-साथ स्वीकृत कार्य की पूर्ति के लिए आवश्यक साधनों का अत्यन्त अभाव आदि कितनी ही कठिनाइयाँ मार्ग में आयें तो भी अपने कार्य के साथ तन्मय होकर ‘मुक्तसंगोऽनहंवादी.....’ इस वृत्ति से सुख-दुख, मानापमान, यशापयश आदि किसी की भी चिन्ता न करते हुए यदि कोई प्रयत्नरत रहेगा तो उसे अवश्य ही सफलता मिलेगी।’’ डॉक्टरजी के छोटे जीवनचिरत्र के आरम्भ में ‘‘क्रियासिद्धिः सत्त्वे भवति महतां पकरणे’’ यह जो सुभाषित दिया है वह उनके ऊपर पूरी तरह घटता है; किंबहुना उनका सम्पूर्ण जीवन ही इस उक्ति का मूर्तिमन्त उदाहरण था। अपने घरबार के कामकाज में हताश होकर हाथ-पाँव छोड़ देनेवालों को, किसी भी सामाजिक कार्य को करते समय बाधाओं से घबड़ाकर निराशा से कार्यविमुख होनेवालों को, इस पवित्र जीवन से आशा का सन...

संघ की शाखाओं का Placement देखकर Cambridge, Harvard, Oxford, IIM, IIT, BIT, NIT पूरी दुनिया हैरान.........

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🚩संघ की शाखाओं का Placement देखकर Cambridge, Harvard, Oxford, IIM, IIT, BIT, NIT पूरी दुनिया हैरान......... 🤔 राष्ट्रपति,,,, प्रधानमंत्री,,,, गृहमंत्री,,, उपराष्ट्रपति,,, लोकसभा सभापती और 18 मुख्यमंत्री,,,, 29 राज्यपाल,,,, 1 लाख शाखाएं,,,, 15 करोड़ स्वयंसेवक,,,, 2 लाख सरस्वती विद्यामंदिर,,,, 5 लाख आचार्य,,,, एक करोड़ विद्यार्थी,,,, 2 करोड़ भारतीय मजदूर संघ के सदस्य,,,, 1 करोड़ ABVP के कार्यकर्ता,,,, 15 करोड़ बीजेपी सदस्य,,,, 1200 प्रकाशन समूह,,,, 9 हजार पूर्णकालिक एवं,,,, 7 लाख पूर्व सैनिक परिषद,,,, 1 करोड़ विश्व हिन्दू परिषद् सदस्य (पूरे विश्व में),,,, 30 लाख बजरंग दल के हिन्दुत्व सेवक,,,, 1.5 लाख सेवाकार्य,,,,, 18 राज्यों में सरकारें,,,, 283 लोकसभा सांसद,,,, 58 राज्यसभा सांसद,,,, 1460 विधायक,,,,         वनवासी कल्याण आश्रम, वनबंधु परिषद, संस्कार भारती, विज्ञान भारती, गंगा समग्र, लघु उद्योग भारती, सेवा सहयोग, सेवा इंटरनॅशनल, राष्ट्रीय सेविका समिती, आरोग्य भारती, दुर्गा वाहिनी, सामाजिक समरसता मंच, ऑ...

डॉ. हेडगेवार जी ने संघ की स्थापना भारत को परम वैभव संपन्न बनाने के लिए की थी – नरेंद्र कुमार जी

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डॉ. हेडगेवार जी ने संघ की स्थापना भारत को परम वैभव संपन्न बनाने के लिए की थी – नरेंद्र कुमार जी ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ रांची (विसंकें)... राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र कुमार जी ने कहा था कि प. पूज्य डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने सन् 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना भारत को परम वैभव सम्पन्न बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रख कर की थी। राष्ट्र को परम वैभव सम्पन्न बनाने का अर्थ है – भारत विश्व का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बने। अपने राष्ट्र को परम वैभव सम्पन्न बनाने के लिए डॉ. हेडगेवार जी ने दो सूत्र बताए….. पहला – व्यक्ति निर्माण यानि अनुशासित, देशभक्त, संस्कारित, देश – समाज के लिए निःस्वार्थ भाव से सेवा के लिए तत्पर रहने वाले नागरिकों का निर्माण। दूसरा – समाज का संगठन यानि वैसे संस्कारित व्यक्तियों के माध्यम से ही समाज को संगठित करना। डॉ. हेडगेवार जी ने इन दोनों कार्यों के लिये शाखा पद्धति बनायी। शाखा में खेल, व्यायाम, समता अभ्यास, गीत, बौद्धिक आदि के माध्यम से जीवन में अनुशासन आता है और सामूहिकता विकसित होती है, जिससे समा...

स्वंयसेवक संघ के संस्थापक डा. केशव राव बलीराम हेडगेवार जी

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स्वंयसेवक संघ के संस्थापक डा. केशव राव बलीराम हेडगेवार जी ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ डा. केशव राव बलीराम हेडगेवार जी का संक्षिप्त जीवन परिचय ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डा. केशव राव बलीराम हेडगेवार (Dr. Keshav Baliram Hedgewar) का जन्म 1 अप्रैल 1889 को नागपुर के एक गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह बचपन से ही क्रांतिकारी प्रवृति के थे और उन्हें अंग्रेज शासको से घृणा थी। अभी स्कूल में ही पढ़ते थे कि अंग्रेज इंस्पेक्टर के स्कूल में निरिक्षण के लिए आने पर केशव राव जी ने अपने कुछ सहपाठियों के साथ उनका “वन्दे मातरम” जयघोष से स्वागत किया जिस पर वह बिफर गया और उसके आदेश पर केशव राव जी को स्कूल से निकाल दिया गया। तब उन्होंने मैट्रिक तक अपनी पढाई पूना के नेशनल स्कूल में पुरी की। 1910 में जब डॉक्टरी की पढाई के लिए कोलकाता गये तो उस समय वहा देश की नामी क्रांतिकारी संस्था अनुशीलन समिति से जुड़ गये। 1915 में नागपुर लौटने पर वह कांग्रेस में सक्रिय हो गये और कुछ समय में विदर्भ प्रांतीय कांग्रेस के सचिव बन गये। 1920 में जब नागपुर में कांग्...

पंडित कांशीराम जी

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पंडित कांशीराम ~~~~~~~~~ 🌺💐🌻🙏🌻💐🌺 तुम भूल ना जाओ उनको, इसलिए लिखी ये कहानी, जो शहीद हुए हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी.. 🌺💐🌻🙏🌻💐🌺 पंडित कांशीराम ग़दर पार्टी के प्रमुख नेता थे और उन्होंने देश की स्वाधीनता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिये थे। पंडित कांशीराम का जन्म 1883 ई. में पंजाब के अंबाला ज़िले में हुआ था। मैट्रिक पास करने के बाद उन्होंने तार भेजने प्राप्त करने का काम सीखा और कुछ दिन अंबाला और दिल्ली में नौकरी की। इसके बाद वे अमेरिका चले गए। यहीं से उनका क्रांतिकारी जीवन आरंभ होता है। आजीविका के लिए पंडित कांशीराम ने ठेकेदारी का काम किया। साथ ही वे 'इंडियन एसोसिएशन ऑफ अमेरिका' और 'इंडियन इंडिपैंडेंट लीग' में शामिल हो गए। उनके ऊपर लाला हरदयाल का बहुत प्रभाव पड़ा। वे संगठन भारत को अंग्रेजों की चुंगल से छुड़ाने के लिए बनाए गए थे। 1913 में पंडित कांशीराम ‘ग़दर पार्टी’ के कोषाध्यक्ष बन गए। जिस समय यूरोप में प्रथम विश्वयुद्ध के बादल मंडरा रहे थे, ग़दर पार्टी ने निश्चय किया कि कुछ लोगों को अमेरिका से भारत वापस जाना चाहिए। वे वहां जाकर भार...

कू (Koo) एप्प पर एक लाख से ज्यादा फॉलोवर्स

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कू (Koo) एप्प पर 1 लाख से अधिक फॉलोवर्स ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ दोस्तों, मैं अगस्त, 2020 को कू (Koo) एप्प डाउनलोड कर उस पर नरेन्द्र मोदी एप्प (Narendra Modi App) से मिली सारी जानकारी को लगातार शेयर कर रही हूँ। अब तक मैं कुल 2400 पोस्ट/जानकारी कू कर चुकी हूँ और लोग भी इन सब जानकारियों/योजनाओं को पसन्द कर रहे हैं व उनका लाभ भी उठा रहे हैं। इस वजह से ही मेरे कू (Koo) एकाउंट पर नरेन्द्र मोदी एप्प से डाली गई सभी पोस्ट/जानकारी की वजह से 28 फरवरी, 2021, यानी सिर्फ 7 महीनों में ही मुझे 1,00,000 (एक लाख) से भी ज्यादा लोग फॉलो करना शुरू कर चुके हैं। आप सभी मेरी ही तरह हमारे महान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रशंसक/भक्त हैं। आप सभी के सहयोग का हार्दिक आभार व शुभकामनाएं। पर क्षमा करना, दोस्तों मैंने ये बात नोट कि हैं, हम लोग अपने इस नरेन्द्र मोदी एप्प पर डाली हर पोस्ट को बहुत ही कम लाईक करते हैं, बहुत ही कम कमेंट करते हैं, बहुत ही कम रिपोस्ट करते हैं और बहुत ही कम शेयर करते हैं। ये बहुत ही गलत बात हैं। अपने इस महान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के एप्प पर हम कोई टाइमपास कर...

23 मार्च : भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव - शहीद दिवस

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23 मार्च : भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव - शहीद दिवस ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 🌺🌹💐🙏💐🌹🌺 तुम भूल ना जाओ उनको, इसलिए लिखी ये कहानी, जो शहीद हुए हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी.. 🌺🌹💐🙏💐🌹🌺 23 मार्च यानि, देश के लिए लड़ते हुए अपने प्राणों को हंसते-हंसते न्यौछावर करने वाले तीन वीर सपूतों का शहीद दिवस। यह दिवस ना केवल देश के प्रति सम्मान और हिंदुस्तानी होने वा गौरव का अनुभव कराता है, बल्कि वीर सपूतों के बलिदान को भीगे मन से श्रृद्धांजलि देता है। उन अमर क्रांतिकारियों के बारे में आम मनुष्य की वैचारिक टिप्पणी का कोई अर्थ नहीं है। उनके उज्ज्वल चरित्रों को बस याद किया जा सकता है कि ऐसे मानव भी इस दुनिया में हुए हैं, जिनके आचरण किंवदंति हैं। भगतसिंह ने अपने अति संक्षिप्त जीवन में वैचारिक क्रांति की जो मशाल जलाई, उनके बाद अब किसी के लिए संभव न होगी। 'आदमी को मारा जा सकता है उसके विचार को नहीं। बड़े साम्राज्यों का पतन हो जाता है लेकिन विचार हमेशा जीवित रहते हैं और बहरे हो चुके लोगों को सुनाने के लिए ऊंची आवाज जरूरी है।' ........... बम फेंकने के बाद भगतसिंह द...

राम मनोहर लोहिया

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राम मनोहर लोहिया ~~~~~~~~~~ राजनेता व स्वतंत्रता सेनानी जन्म : 23 मार्च, 1910, अकबरपुर, फैजाबाद निधन : 12 अक्टूबर, 1967, नई दिल्ली कार्य क्षेत्र : स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता राम मनोहर लोहिया एक स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर समाजवादी और सम्मानित राजनीतिज्ञ थे. राम मनोहर ने हमेशा सत्य का अनुकरण किया और आजादी की लड़ाई में अद्भुत काम किया. भारत की राजनीति में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान और उसके बाद ऐसे कई नेता आये जिन्होंने अपने दम पर राजनीति का रुख़ बदल दिया उन्ही नेताओं में एक थे राममनोहर लोहिया। वे अपनी प्रखर देशभक्ति और तेजस्‍वी समाजवादी विचारों के लिए जाने गए और इन्ही गुडों के कारण अपने समर्थकों के साथ-साथ उन्होंने अपने विरोधियों से भी बहुत  सम्‍मान हासिल किया। बचपन और प्रारंभिक जीवन ~~~~~~~~~~~~~~~ राम मनोहर लोहिया का जन्म 23 मार्च, 1910 को उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में हुआ था। उनकी मां एक शिक्षिका थीं। जब वे बहुत छोटे थे तभी उनकी मां का निधन हो गया था। अपने पिता से जो एक राष्ट्रभक्त थे, उन्हें युवा अवस्था में ही विभिन्न रैलियों और विरोध सभाओं के माध्यम से भारत के स्...

शहीदी दिवस (भगत सिंह)

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★जरा याद करो कुर्बानी★ #बलिदान_दिवस #भगत_सिंह -- उनकी जेब में करतार सिंह साराभाई, भगवत गीता और स्वामी विवेकानंद की जीवनी रहती थी और फिर वो लिखते हैं ‘वाइ आई एम एन अथीस्ट’? मैं नास्तिक क्यों हूँ ?? जी हाँ मैं बात कर रही हूँ अमर शहीद भगत सिंह जी की ...... आज उनका बलिदान दिवस है तो आइए उनके कुछ अनसुने किस्से आपसे साझा करती हूँ -- मेरे जीने का मकसद ~~~~~~~~~~~ ★★ लाहौर जेल में बंद कुछ कैदियों की ‌एक चिट्ठी जेल में ही बंद एक नौजवान के पास पहुंची, जिसमें लिखा था कि "हमने अपने भागने के लिए एक रास्ता बनाया है, लेकिन हम चाहते हैं कि हमारी जगह आप उससे निकल जाएं"। युवक ने चिट्ठी के बदले में जवाब भेजा। "धन्यवाद.....मैं आपका आभारी हूं लेकिन ये आग्रह स्वीकार नहीं कर सकता अगर ऐसा किया तो मेरे जीने का मकसद ही खत्म हो जाएगा। मैं चाहता हूं मेरी शहादत देश के काम आए और युवाओं में प्रेरणा और जोश भरने का काम करे, जिससे देश को जल्द से जल्द आजादी मिल सके।" वो युवक थे 24 साल के भगत सिंह। #फाँसी_के_वक़्त_वो_लेनिन_को_पढ़_रहे_थे_ये_सफेद_झूठ -- ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~...