अमर शहीद यतींद्र नाथ दास (जतिन दा)
अमर शहीद यतींद्र नाथ दास (जतिन दा) ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 🌺🥀🌹🙏🌷🪷💐 तुम भूल ना जाओ उनको, इसलिए लिखी ये कहानी, जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुर्बानी... 🌺🥀🌹🙏🌷🪷💐 शरीर से मांस का एक-एक कतरा गल चुका था। पसलियां बाहर आ गई थीं। हिलने-डुलने तक की ताकत नहीं बची थी। जब अंग्रेजों ने देखा कि यह 25 साल का लड़का टूट नहीं रहा, तो उन्होंने जबरदस्ती उसकी नाक में नली ठूंसकर दूध पिलाने की कोशिश की। वह नली खाने की नली की जगह उसके फेफड़ों में चली गई। दूध फेफड़ों में भर गया। वो तड़पते रहे, खून की उल्टियां करते रहे, लेकिन उन्होंने अपना अनशन नहीं तोड़ा। 13 सितंबर 1929 को लाहौर जेल में एक क्रांतिकारी ने अपने प्राण त्याग दिए। 63 दिन... जी हाँ, 63 दिन तक बिना अन्न का एक दाना खाए बिना। इतिहास के पन्नों में अक्सर हम भगत सिंह की फांसी की बात करते हैं, लेकिन उस साथी को भूल जाते हैं जिसने भगत सिंह की बाहों में दम तोड़ा था। आज हम बात कर रहे हैं 'यतींद्र नाथ दास' की, जिन्हें दुनिया 'जतिन दा' के नाम से जानती थी। पेशे से वो बम बनाने में माहिर थे, लेकिन उनका हथियार बन...