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गुरु अर्जुन देव (पंचम सिख गुरु)

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गुरु अर्जुन देव (पंचम सिख गुरु) ~~~~~~~~~~~~~~~~ 🌺🥀🌹🙏🙏🌻🌷💐 तुम भूल न जाओ उनको,  इसलिए लिखी यह कहानी, जो शहीद हुए हैं उनकी,  ज़रा याद करो कुर्बानी... 🌺🥀🌹🙏🙏🌻🌷💐  गुरू अर्जुन देव सिखों के 5वे गुरु थे। गुरु अर्जुन देव जी शहीदों के सरताज एवं शान्तिपुंज हैं। आध्यात्मिक जगत में गुरु जी को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। उन्हें ब्रह्मज्ञानी भी कहा जाता है। गुरुग्रंथ साहिब में तीस रागों में गुरु जी की वाणी संकलित है। गणना की दृष्टि से श्री गुरुग्रंथ साहिब में सर्वाधिक वाणी पंचम गुरु की ही है।  ग्रंथ साहिब का संपादन गुरु अर्जुन देव जी ने भाई गुरदास की सहायता से 1604में किया। ग्रंथ साहिब की संपादन कला अद्वितीय है, जिसमें गुरु जी की विद्वत्ता झलकती है। उन्होंने रागों के आधार पर ग्रंथ साहिब में संकलित वाणियों का जो वर्गीकरण किया है, उसकी मिसाल मध्यकालीन धार्मिक ग्रंथों में दुर्लभ है। यह उनकी सूझबूझ का ही प्रमाण है कि ग्रंथ साहिब में 36महान वाणीकारों की वाणियां बिना किसी भेदभाव के संकलित हुई।  अर्जुन देव जी गुरु राम दास के सुपुत्र थे। उनकी माता का नाम बीव...

वीरांगना झलकारी बाई जी

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वीरांगना झलकारी बाई ~~~~~~~~~~~~ 💐🙏🙏💐 "जा कर रण में ललकारी थी,  वह तो झांसी की झलकारी थी", इन्हें कहते हैं दूसरी रानी लक्ष्मीबाई..... 💐🙏🙏💐 झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई जी का जिक्र हो और वीरांगना झलकारी बाई जी का जिक्र ना हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। आइये जानते हैं महारानी लक्ष्मीबाई की छाया झलकारी बाई जी के बारे में..... 🙏 देश के लिए मर-मिटने वाली झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई का नाम हर किसी के दिल में बसा है। कोई अगर भुलाना भी चाहे तब भी भारत माँ की इस महान बेटी को नहीं भुला सकता। लेकिन रानी लक्ष्मी बाई के ही साथ देश की एक और बेटी थी, जिसके सर पर ना रानी का ताज था और ना ही सत्ता पर। फिर भी अपनी मिट्टी के लिए वह जी-जान से लड़ी और इतिहास पर अपनी अमिट छाप छोड़ गयी। वह वीरांगना, जिसने न केवल 1857 की क्रांति में भाग लिया बल्कि अपने देशवासियों और अपनी रानी की रक्षा के लिए अपने प्राणों की भी परवाह नहीं की! वो थी झांसी की रानी लक्ष्मी बाई की परछाई बन अंग्रेजों से लोहा लेने वाली, वीरांगना झलकारी बाई। झलकारी बाई का जन्म 22 नवम्बर 1830 को उत्तर प्रदेश के झांसी के पास के भो...

झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई

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★ झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई ★ ●~~~~~~~~~~~~~~~~~● 🌿 चमक उठी सन 57 में, वो तलवार पुरानी थी 🌿 🌿 खुब लड़ी मर्दानी वो तो, झाँसी वाली रानी थी 🌿 रानी लक्ष्मीबाई उर्फ़ झाँसी की रानी मराठा शासित राज्य झाँसी की रानी थी। जो उत्तर-मध्य भारत में स्थित है। रानी लक्ष्मीबाई 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना थी जिन्होंने अल्पायु में ही ब्रिटिश साम्राज्य से संग्राम किया था। पूरा नाम    – राणी लक्ष्मीबाई गंगाधरराव जन्म         – 19 नवम्बर, 1835 जन्मस्थान – वाराणसी पिता        – श्री मोरोपन्त माता        – भागीरथी शिक्षा       – मल्लविद्या, घुसडवारी और शस्त्र विद्याए सीखी विवाह      – राजा गंगाधरराव के साथ ★Queen of Jhansi Rani Lakshmi Bai – झांसी की रानी लक्ष्मी बाई★ लक्ष्मीबाई का जन्म वाराणसी जिले के भदैनी नमक नगर में हुआ था। उनके बचपन का नाम मणिकर्णिका था परन्तु प्यार से उसे म...

राजमाता जीजाबाई

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राजमाता जीजाबाई ~~~~~~~~~~ जीजाबाई (1594-1674) महान मराठा शासक और योद्धा शिवाजी की माताजी थी। शिवाजी मुगल साम्राज्य के खिलाफ मजबूती से लड़े और हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की। जीजाबाई का जन्म 1594 में महाराष्ट्र के एक गांव सिंधखेड़ में हुआ था। उनके पिता शाही दरबारी और प्रमुख मराठा सरदार थे, जिनका नाम लखुजी जाधवराव था, जबकि उनकी माता का नाम म्हालसा बाई था। उनके पिता अहमदनगर में निजामशाही की सेवा करते थे और उन्हें अपने ऊंचे रुतबे और पद पर गर्व था। जीजाबाई की शादी बहुत कम उम्र में हो गई थी। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ उस कालखंड के रीति-रिवाज के मुताबिक उनका विवाह शाहजी भोसले से हुआ। शाहजी भी निजाम शाह के दरबार में राजनयिक पद संभालते थे। वे एक बेहतरीन योद्धा भी थे। शाहजी भोसले के पिताजी का नाम मालोजी शिलेदार था, जो बाद में तरक्की पाते हुए ‘सरदार मालोजी राव भोसले’ बन गए। वैसे तो दंपती का वैवाहिक जीवन बेहद सुखद था। लेकिन उनके परिजनों की आपसी टकराहट ने तनाव को जन्म दिया। शाहजी राजे और उनके ससुर जाधव के आपसी रिश्ते बिगड़ गए। हालात इतने बिगड़ चुके थे कि जीजाबाई पूरी तरह टूट गई थी। ...

अजीत डोभाल (संक्षिप्त परिचय)

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अजीत डोभाल (संक्षिप्त परिचय)  ~~~~~~~~~~~~~~~~~ "चुपचाप चलने वाला ऐसा आदमी...उत्तराखंड की पहाड़ियों मे ही पैदा होता है." साल 1945... उत्तराखंड की पहाड़ियों में एक छोटे से गाँव में एक बच्चा पैदा होता है — नाम रखा जाता है अजीत। कौन जानता था कि ये बालक एक दिन उन लड़ाइयों का हिस्सा बनेगा, जिनके बारे में इतिहास की किताबें भी नहीं लिखेंगी। वो लड़ाइयाँ जो संसद में नहीं, बल्कि परछाइयों में लड़ी जाती हैं। नकाब में। झूठी पहचान में। मौत के साए में। उसकी आँखों में एक अलग चमक थी — ना डरने वाली, ना रुकने वाली। 22 की उम्र में UPSC निकाली। IPS बने। लेकिन ये उनकी मंज़िल नहीं थी — ये तो सिर्फ रास्ता था। --- 1971, केरल। दंगे फूट चुके थे। पुलिस थर-थर काँप रही थी। और तभी एक दुबला-पतला नौजवान, बिना बंदूक, अकेला, दंगाइयों की भीड़ में घुस जाता है। बोलता है, समझाता है, डर नहीं दिखाता — और एक हफ्ते में शांति लौट आती है। लोग पूछते हैं — “ये कौन है?” किसी ने धीरे से कहा, “नाम याद रखना — अजीत डोभाल।” --- मिज़ोरम। जंगलों में विद्रोही छिपे थे। लालडेंगा और उसका संगठन, भारत के खिलाफ। अजीत डोभाल व...

गोपाल कृष्ण गोखले जी

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गोपाल कृष्ण गोखले ~~~~~~~~~~~ जन्म: 9 मई, 1866 निधन: 19 फरवरी, 1915 उपलब्धियां: महात्मा गांधी के राजनैतिक गुरु, भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के मार्ग दर्शकों में से एक, सर्वेन्ट्स ऑफ इंडिया सोसायटी के संस्थापक गोपाल कृष्ण गोखले भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के मार्गदर्शकों में से एक थे। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। गांधीजी उन्हें अपना राजनैतिक गुरु मानते थे। राजनैतिक नेता होने के आलावा वह एक समाज सुधारक भी थे। उन्होंने एक संस्था “सर्वेन्ट्स ऑफ इंडिया सोसायटी” की स्थापना की जो आम लोगों के हितों के लिए समर्पित थी। देश की आजादी और राष्ट्र निर्माण में गोपाल कृष्ण गोखले का योगदान अमूल्य है। गोपाल कृष्ण गोखले का जन्म 9 मई 1866 को महाराष्ट्र के कोथापुर में हुआ था। उनके पिता कृष्ण राव एक किसान थे पर चूँकि क्षेत्र की मिट्टी कृषि के लिए अनुकूल नहीं थी इस कारण क्लर्क का काम करने पर मजबूर हो गए। उनकी माता वालूबाई एक साधारण महिला थीं। गोखले ने अपने बड़े भाई द्वारा आर्थिक सहायता से कोथापुर के राजाराम हाई स्कूल में अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। बाद में वह मुंबई चले गए और 1884 म...

गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर जी

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गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर  ~~~~~~~~~~~~ रबिन्द्रनाथ टैगोर जी एक विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के नोबल पुरस्कार विजेता हैं। उन्हें गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले वह युगदृष्टा थे। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति हैं। वे एकमात्र कवि हैं जिसकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं - भारत का राष्ट्र-गान 'जन गण मन' और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान 'आमार सोनार बाँग्ला' गुरुदेव जी की ही रचनाएँ हैं।  रवींद्रनाथ टैगोर का जीवनी ~~~~~~~~~~~~~~ गुरु रवींद्रनाथ टैगोर एक कवि, उपन्‍यासकार, नाटककार, चित्रकार, और दार्शनिक थे। रवींद्रनाथ टैगोर एशिया के प्रथम व्‍यक्ति थे, जिन्‍हें नोबल पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया था।   वे अपने माता-पिता की तेरहवीं संतान थे। बचपन में उन्‍हें प्‍यार से 'रबी' बुलाया जाता था। आठ वर्ष की उम्र में उन्‍होंने अपनी पहली कविता लिखी, सोलह साल की उम्र में उन्‍होंने कहानियां और नाटक लिखना प्रारंभ कर दिया था।    अप...

महापराक्रमी महाराणा प्रताप सिंह

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महाराणा प्रताप सिंह  ~~~~~~~~~~~ महाराणा प्रताप सिंह : मेवाड़ के महाराणा शासन : 1572 - 1597 राज तिलक : 1 मार्च 1572 पूरा नाम : महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया पूर्वाधिकारी : उदयसिंह द्वितीय उत्तराधिकारी : महाराणा अमर सिंह जीवन संगी : 11 पत्नियाँ संतान : अमर सिंह, भगवान दास (17 पुत्र) राज घराना : सिसोदिया पिता : उदयसिंह द्वितीय माता : महाराणी जयवंताबाई धर्म : सनातन धर्म महापराक्रमी वीर राजा, मेवाड़ के हिन्दू राजपूत शासक जीवन ~~~~ महाराणा प्रताप सिंह ( ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया रविवार विक्रम संवत 1597 तदानुसार 9 मई 1540- –19 जनवरी 1597) उदयपुर, मेवाड में शिशोदिया राजवंश के राजा थे। उनका नाम इतिहास में वीरता और दृढ प्रण के लिये अमर है। उन्होंने कई सालों तक क्रूर मुगल सम्राट अकबर के साथ संघर्ष किया। महाराणा प्रताप सिंह ने मुगलो को कई बार युद्ध में भी हराया। उनका जन्म राजस्थान के कुम्भलगढ में महाराणा उदयसिंह एवं माता राणी जीवत कँवर के घर हुआ था। सन 1576 के हल्दीघाटी युद्ध में 20,000 राजपूतों को साथ लेकर राणा प्रताप ने मुगल सरदार राजा मानसिंह के 80,000 मु...

पेशवा बाजीराव बल्लाल जी

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पेशवा बाजीराव बल्लाल जी ~~~~~~~~~~~~~~ 🚩 💐💐🙏🙏💐💐🚩 तुम भूल न जाओ उनको,  इसलिए लिखी यह कहानी.... 🚩 💐💐🙏🙏💐💐🚩 जिस व्यक्ति ने अपनी आयु के 20 वे वर्ष में पेशवाई के सूत्र संभाले हों,|| 40 वर्ष तक के कार्यकाल में 42 युद्ध लड़े हों और सभी जीते हों यानि जो सदा "अपराजेय" रहा हो,|| जिसके एक युद्ध को अमेरिका जैसा राष्ट्र अपने सैनिकों को पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ा रहा हो ..ऐसे 'परमवीर' को आप क्या कहेंगे ...? आप उसे नाम नहीं दे पाएंगे ..क्योंकि आपका उससे ज्यादा परिचय ही नहीं,|| सन 18 अगस्त सन् 1700 में जन्मे उस महान पराक्रमी पेशवा का नाम है -  " बाजीराव बल्लाल पेशवा "|| "अगर मुझे पहुँचने में देर हो गई तो इतिहास लिखेगा कि एक राजपूत ने मदद मांगी और ब्राह्मण केवल भोजन करता रहा||" ऐसा कहते हुए भोजन की थाली छोड़कर बाजीराव अपनी सेना के साथ राजा छत्रसाल की मदद को बिजली की गति से दौड़ पड़े,|| धरती के महानतम योद्धाओं में से एक, अद्वितीय, अपराजेय और अनुपम योद्धा थे पेशवा बाजीराव बल्लाल,|| छत्रपति शिवाजी महाराज का हिन्दवी स्वराज का सपना जिसे पूरा कर...