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संघ प्रार्थना ⛳⛳

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🚩🚩 संघ प्राथना 🇮🇳🇮🇳  1) नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे, त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोहम् ।🚩 हे प्यार करने वाली मातृभूमि ! मैं तुझे सदा (सदैव) नमस्कार करता हूँ । तूने मेरा सुख से पालन-पोषण किया है ।🚩 2) महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे, पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते।। १।।🚩 हे महामंगलमयी पुण्यभूमि ! तेरे ही कार्य में मेरा यह शरीर अर्पण हो । मैं तुझे बारम्बार नमस्कार करता हूँ ।🚩 3) प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता, इमे सादरं त्वाम नमामो वयम् त्वदीयाय कार्याय बध्दा कटीयं, शुभामाशिषम देहि तत्पूर्तये।🚩 हे सर्वशक्तिशाली परमेश्वर ! हम हिन्दूराष्ट्र के सुपुत्र तुझे आदर सहित प्रणाम करते हैं। तेरे ही कार्य के लिए हमने अपनी कमर कसी है । उसकी पूर्ति के लिए हमें अपना शुभाशीर्वाद दे । 🚩 4) अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिम, सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्, श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्ण मार्गं, स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत् ।। २।।🚩 हे प्रभु ! हमें ऐसी शक्ति दे, जिसे विश्व में कभी कोई चुनौती न दे सके, ऐसा शुद्ध चारित्र्य दे जिसके समक्ष सम्पूर्ण विश्व नतमस्तक हो जाये ऐसा ज्ञान दे कि स्वयं के...

ऑपरेशन सिंदूर

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🇮🇳 Operation Sindoor 🇮🇳 🇮🇳 Operation सिंदूर...🔴 🇮🇳 यह सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं था… यह भारत के सम्मान की लकीर थी… जो दुश्मन की छाती पर खींच दी गई थी। 🇮🇳🔥 जब दुश्मन ने सोचा भारत चुप रहेगा… जब उन्हें लगा कि फिर सिर्फ बयान आएंगे… तभी भारत ने जवाब दिया — खामोशी से… सटीक… और करारा। मिशन सिंदूर ने बता दिया — भारत अब सहने वाला नहीं… भारत अब चेतावनी नहीं देता… भारत सीधा हिसाब करता है। सीमा के उस पार बैठे आतंक के आकाओं को पहली बार समझ आया — भारत बदल चुका है। ये वो कहानी है… जिसे आज हम गर्व से सुनते हैं… और गर्व से सुनाते हैं... और आने वाले सालों में अगर इस पर कोई फिल्म बनेगी… तो कुछ लोग कहेंगे — "ये तो प्रोपेगेंडा है" लेकिन सच ये है — जब इतिहास में भारत का साहस लिखा जाता है, तो कमजोर दिल वालों को वो हमेशा "प्रोपेगेंडा" ही लगता है। मिशन सिंदूर ने दुनिया को दिखा दिया — भारत शांति चाहता है… लेकिन अगर कोई सिंदूर मिटाने की कोशिश करेगा… तो भारत दुश्मन का अस्तित्व मिटा देगा। 🔥 🇮🇳 भारत के वीरों को प्रणाम 🇮🇳 🇮🇳 देश के सम्मान को ...

फील्ड मार्शल मानेकशा जी

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फील्ड मार्शल मानेकशा जी  ~~~~~~~~~~~~~~ 3 अप्रैल/जन्म-दिवस 20वीं शती के प्रख्यात सेनापति फील्ड मार्शल सैमजी होरमुसजी फ्रामजी जमशेदजी मानेकशा का जन्म 3 अपै्रल 1914 को एक पारसी परिवार में अमृतसर में हुआ था। उनके पिता जी वहां चिकित्सक थे। पारसी परम्परा में अपने नाम के बाद पिता, दादा और परदादा का नाम भी जोड़ा जाता है; पर वे अपने मित्रों में अंत तक सैम बहादुर के नाम से प्रसिद्ध रहे। सैम मानेकशा का सपना बचपन से ही सेना में जाने का था। 1942 में उन्होंने मेजर के नाते द्वितीय विश्व युद्ध में गोरखा रेजिमेंट के साथ बर्मा के मोर्चे पर जापान के विरुद्ध युद्ध किया। वहां उनके पेट और फेफड़ों में मशीनगन की नौ गोलियां लगीं। शत्रु ने उन्हें मृत समझ लिया; पर अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के बल पर वे बच गये। इतना ही नहीं, वह मोर्चा भी उन्होंने जीत लिया। उनकी इस वीरता पर शासन ने उन्हें ‘मिलट्री क्रास’ से सम्मानित किया। 1971 में पश्चिमी पाकिस्तान के अत्याचारों के कारण पूर्वी पाकिस्तान के लोग बड़ी संख्या में भारत आ रहे थे। उनके कारण भारत की अर्थव्यवस्था पर बड़ा दबाव पड़ रहा था तथा वातावरण भी खराब हो र...

हंसा जीवराज मेहता जी

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हंसा जीवराज मेहता जी ~~~~~~~~~~~~~ 4 अप्रैल/पुण्यतिथि हंसा मेहता जी का जन्म 3 जुलाई 1897 को बॉम्बे राज्य (वर्तमान में गुजरात) के एक नागर ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह मनुभाई मेहता की बेटी थी (जो तत्कालीन बड़ौदा राज्य के दीवान थे) और नंदशंकर मेहता की पोती, (जो गुजराती भाषा के पहले उपन्यास करण घेलो के लेखक थे)। उन्होंने 1918 में दर्शनशास्त्र में स्नातक किया, जिसके बाद उन्होंने इंग्लैंड में पत्रकारिता और समाजशास्त्र का अध्ययन किया। 1918 में वे सरोजिनी नायडू जी से और बाद में वह 1922 में महात्मा गांधी से मिलीं। उनकी शादी प्रख्यात चिकित्सक और प्रशासक जीवराज नारायण मेहता से हुई थी। हंसा मेहता जी ने विदेशी कपड़े और शराब बेचने वाली दुकानों के बहिष्कार का आयोजन किया, और महात्मा गांधी की सलाह पर अन्य स्वतंत्रता आंदोलन गतिविधियों में भाग लिया। यहां तक कि उन्हें 1932 में अपने पति के साथ अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर जेल तक भेज दिया था। बाद में वह बॉम्बे विधान परिषद से प्रतिनिधि चुनी गईं। स्वतंत्रता के बाद, वे उन 15 महिलाओं में शामिल थीं, जो भारतीय संविधान का मसौदा तैयार करने वाली घटक ...

एक भारतीय आत्मा माखनलाल चतुर्वेदी जी

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एक भारतीय आत्मा माखनलाल चतुर्वेदी जी ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 4 अप्रैल/जन्म-दिवस श्री माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म 4 अप्रैल, 1889 को ग्राम बाबई, जिला होशंगाबाद, मध्य प्रदेश में श्री नन्दलाल एवं श्रीमती सुन्दराबाई के घर में हुआ था। उन पर अपनी माँ और घर के वैष्णव वातावरण का बहुत असर था। वे बहुत बुद्धिमान भी थे। एक बार सुनने पर ही कोई पाठ उन्हें याद हो जाता था। चैदह वर्ष की अवस्था में उनका विवाह हो गया। इस समय तक वे ‘एक भारतीय आत्मा’ के नाम से कविताएँ व नाटक लिखने लगे थे। 1906 में कांग्रेस के कोलकाता में सम्पन्न हुए अधिवेशन में माखनलाल जी ने पहली बार लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के दर्शन किये। अपने तरुण साथियों के साथ उनकी सुरक्षा करते हुए वे प्रयाग तक गये। तिलक जी के माध्यम से वे क्रान्तिकारियों के सम्पर्क में आये। महाराष्ट्र के क्रान्तिवीर सखाराम गणेश देउस्कर से दीक्षा लेकर उन्होंने अपने रक्त से प्रतिज्ञा पत्र पर हस्ताक्षर किये। फिर उन्होंने पिस्तौल चलाना भी सीखा। इसके बाद उनका रुझान पत्रकारिता की ओर हो गया। उन्होंने अनेक हिन्दी और मराठी के पत्रों में सम्पादन एवं लेखन का कार्य किया। ...

विरांगना झलकारी बाई जी

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वीरांगना झलकारी बाई जी ~~~~~~~~~~~~~~ 🌷🌹🌺🙏🚩🙏🌹🌷 तुम भूल ना जाओ उनको, इसलिए लिखी ये कहानी, जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुर्बानी... 🌷🌹🌺🙏🚩🙏🌹🌷  "जा कर रण में ललकारी थी,  वह तो झांसी की झलकारी थी", इन्हें कहते हैं दूसरी रानी लक्ष्मीबाई.....  देश के लिए मर-मिटने वाली झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई का नाम हर किसी के दिल में बसा है। कोई अगर भुलाना भी चाहे तब भी भारत माँ की इस महान बेटी को नहीं भुला सकता। लेकिन रानी लक्ष्मी बाई के ही साथ देश की एक और बेटी थी, जिसके सर पर ना रानी का ताज था और ना ही सत्ता पर। फिर भी अपनी मिट्टी के लिए वह जी-जान से लड़ी और इतिहास पर अपनी अमिट छाप छोड़ गयी।  वह वीरांगना, जिसने ना केवल 1857 की क्रांति में भाग लिया बल्कि अपने देशवासियों और अपनी रानी की रक्षा के लिए अपने प्राणों की भी परवाह नहीं की!  वो थी झांसी की रानी लक्ष्मी बाई की परछाई बन अंग्रेजों से लोहा लेने वाली, वीरांगना झलकारी बाई।  झलकारी बाई का जन्म 22 नवम्बर, 1830 को ग्राम भोजला (झांसी, उ.प्र.) में हुआ था। उसके पिता मूलचन्द्र जी सेना में काम करते थे।...

भारत - हमारी पहचान ; सनातन - हमारी शान ; भाजपा - हमारी जान

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भारत - हमारी पहचान  सनातन - हमारी शान  भाजपा - हमारी जान  विश्व का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र (ऋषि मुनियों द्वारा किया गया अनुसंधान) ■ काष्ठा = सैकन्ड का  34000 वाँ भाग ■ 1 त्रुटि  = सैकन्ड का 300 वाँ भाग ■ 2 त्रुटि  = 1 लव , ■ 1 लव = 1 क्षण ■ 30 क्षण = 1 विपल , ■ 60 विपल = 1 पल ■ 60 पल = 1 घड़ी (24 मिनट ) , ■ 2.5 घड़ी = 1 होरा (घन्टा ) ■3 होरा=1प्रहर व 8 प्रहर 1 दिवस (वार) ■ 24 होरा = 1 दिवस (दिन या वार) , ■ 7 दिवस = 1 सप्ताह ■ 4 सप्ताह = 1 माह , ■ 2 माह = 1 ऋतू ■ 6 ऋतू = 1 वर्ष , ■ 100 वर्ष = 1 शताब्दी ■ 10 शताब्दी = 1 सहस्राब्दी , ■ 432 सहस्राब्दी = 1 युग ■ 2 युग = 1 द्वापर युग , ■ 3 युग = 1 त्रैता युग , ■ 4 युग = सतयुग ■ सतयुग + त्रेतायुग + द्वापरयुग + कलियुग = 1 महायुग ■ 72 महायुग = मनवन्तर , ■ 1000 महायुग = 1 कल्प ■ 1 नित्य प्रलय = 1 महायुग (धरती पर जीवन अन्त और फिर आरम्भ ) ■ 1 नैमितिका प्रलय = 1 कल्प ।(देवों का अन्त और जन्म ) ■ महालय  = 730 कल्प ।(ब्राह्मा का अन्त और जन्म ) सम्पूर्ण विश्व का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणन...

संघ संस्थापक डा० केशवराव हेडगेवार जी

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संघ संस्थापक डा० हेडगेवार जी ~~~~~~~~~~~~~~~~ 1 अप्रैल/जन्म-दिवस अंग्रेजी सन अनुसार 1 अप्रैल 1889 विक्रम संवत के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा जो इस वर्ष 19 मार्च को थी। विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आज कौन नहीं जानता ? भारत के कोने-कोने में इसकी शाखाएँ हैं। विश्व में जिस देश में भी हिन्दू रहते हैं, वहाँ किसी ना किसी रूप में संघ का काम है। संघ के निर्माता डा० केशवराव हेडगेवार जी का जन्म अंग्रेजी सन के अनुसार एक अप्रेल, 1889 (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, वि. सम्वत् 1946) को नागपुर में हुआ था। इनके पिता श्री बलिराम हेडगेवार तथा माता श्रीमती रेवतीवाई थीं। केशव जी जन्मजात देशभक्त थे। बचपन से ही उन्हें नगर में घूमते  हुए अंग्रेज सैनिक, सीताबर्डी के किले पर फहराता अंग्रेजों का झण्डा यूनियन जैक तथा विद्यालय में गाया जाने वाला गीत ‘गाॅड सेव दि किंग’ बहुत बुरा लगता था। उन्होंने एक बार सुरंग खोदकर उस झंडे को उतारने की योजना भी बनाई; पर बालपन की यह योजना सफल नहीं हो पाई।  वे सोचते थे कि इतने बड़े देश पर पहले मुगलों ने और फिर सात समुन्दर पार से आये अंग्र...

गुरु तेग़ बहादुर सिंह जी

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गुरु तेग़ बहादुर सिंह जी ~~~~~~~~~~~~~ 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 💐💐💐💐💐💐💐 तुम भूल ना जाओ उनको, इसलिए लिखी ये कहानी, जो शहीद हुए हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी... 💐💐💐💐💐💐💐 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏  हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर जी के लिए सिख स्कालर राजिंदर सिंह कहते हैं कि गुरु तेग बहादुर जी ने गुरु गद्दी, गुरु हरिकृष्ण साहिब से ली जो उस समय दिल्ली में हैजा जैसी बीमारी के बीच जान गंवा रहे लोगों की सेवा करते हुए ज्योति जोत समा गए। अब एक बार फिर वैसे ही हालात हैं। जो संस्थाएं श्री गुरु तेग बहादुर जी का प्रकाशोत्सव मना रही हैं उनके कंधों पर यह जिम्मेदारी है कि वह मानवता की सेवा करके गुरु के संदेश को दुनिया तक पहुंचाएं।  माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने ट्विटर पर भी नागरिकों को लिखा था “अपने 400 वें प्रकाश पूरब के विशेष अवसर पर, मैं श्री गुरु तेग बहादुर जी को नमन करता हूं। उनके साहस और दलितों की सेवा के उनके प्रयासों के लिए उन्हें विश्व स्तर पर सम्मानित किया जाता है। उन्होंने अत्याचार और अन्याय के सामने झुकने से इनकार कर दिया था। उनका सर्वोच्च बलिदान कई लोगों को श...