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Showing posts from June, 2026

गुरु अर्जुन देव (पंचम सिख गुरु)

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गुरु अर्जुन देव (पंचम सिख गुरु) ~~~~~~~~~~~~~~~~ 🌺🥀🌹🙏🙏🌻🌷💐 तुम भूल न जाओ उनको,  इसलिए लिखी यह कहानी, जो शहीद हुए हैं उनकी,  ज़रा याद करो कुर्बानी... 🌺🥀🌹🙏🙏🌻🌷💐  गुरू अर्जुन देव सिखों के 5वे गुरु थे। गुरु अर्जुन देव जी शहीदों के सरताज एवं शान्तिपुंज हैं। आध्यात्मिक जगत में गुरु जी को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। उन्हें ब्रह्मज्ञानी भी कहा जाता है। गुरुग्रंथ साहिब में तीस रागों में गुरु जी की वाणी संकलित है। गणना की दृष्टि से श्री गुरुग्रंथ साहिब में सर्वाधिक वाणी पंचम गुरु की ही है।  ग्रंथ साहिब का संपादन गुरु अर्जुन देव जी ने भाई गुरदास की सहायता से 1604में किया। ग्रंथ साहिब की संपादन कला अद्वितीय है, जिसमें गुरु जी की विद्वत्ता झलकती है। उन्होंने रागों के आधार पर ग्रंथ साहिब में संकलित वाणियों का जो वर्गीकरण किया है, उसकी मिसाल मध्यकालीन धार्मिक ग्रंथों में दुर्लभ है। यह उनकी सूझबूझ का ही प्रमाण है कि ग्रंथ साहिब में 36महान वाणीकारों की वाणियां बिना किसी भेदभाव के संकलित हुई।  अर्जुन देव जी गुरु राम दास के सुपुत्र थे। उनकी माता का नाम बीव...

वीरांगना झलकारी बाई जी

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वीरांगना झलकारी बाई ~~~~~~~~~~~~ 💐🙏🙏💐 "जा कर रण में ललकारी थी,  वह तो झांसी की झलकारी थी", इन्हें कहते हैं दूसरी रानी लक्ष्मीबाई..... 💐🙏🙏💐 झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई जी का जिक्र हो और वीरांगना झलकारी बाई जी का जिक्र ना हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। आइये जानते हैं महारानी लक्ष्मीबाई की छाया झलकारी बाई जी के बारे में..... 🙏 देश के लिए मर-मिटने वाली झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई का नाम हर किसी के दिल में बसा है। कोई अगर भुलाना भी चाहे तब भी भारत माँ की इस महान बेटी को नहीं भुला सकता। लेकिन रानी लक्ष्मी बाई के ही साथ देश की एक और बेटी थी, जिसके सर पर ना रानी का ताज था और ना ही सत्ता पर। फिर भी अपनी मिट्टी के लिए वह जी-जान से लड़ी और इतिहास पर अपनी अमिट छाप छोड़ गयी। वह वीरांगना, जिसने न केवल 1857 की क्रांति में भाग लिया बल्कि अपने देशवासियों और अपनी रानी की रक्षा के लिए अपने प्राणों की भी परवाह नहीं की! वो थी झांसी की रानी लक्ष्मी बाई की परछाई बन अंग्रेजों से लोहा लेने वाली, वीरांगना झलकारी बाई। झलकारी बाई का जन्म 22 नवम्बर 1830 को उत्तर प्रदेश के झांसी के पास के भो...

झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई

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★ झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई ★ ●~~~~~~~~~~~~~~~~~● 🌿 चमक उठी सन 57 में, वो तलवार पुरानी थी 🌿 🌿 खुब लड़ी मर्दानी वो तो, झाँसी वाली रानी थी 🌿 रानी लक्ष्मीबाई उर्फ़ झाँसी की रानी मराठा शासित राज्य झाँसी की रानी थी। जो उत्तर-मध्य भारत में स्थित है। रानी लक्ष्मीबाई 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना थी जिन्होंने अल्पायु में ही ब्रिटिश साम्राज्य से संग्राम किया था। पूरा नाम    – राणी लक्ष्मीबाई गंगाधरराव जन्म         – 19 नवम्बर, 1835 जन्मस्थान – वाराणसी पिता        – श्री मोरोपन्त माता        – भागीरथी शिक्षा       – मल्लविद्या, घुसडवारी और शस्त्र विद्याए सीखी विवाह      – राजा गंगाधरराव के साथ ★Queen of Jhansi Rani Lakshmi Bai – झांसी की रानी लक्ष्मी बाई★ लक्ष्मीबाई का जन्म वाराणसी जिले के भदैनी नमक नगर में हुआ था। उनके बचपन का नाम मणिकर्णिका था परन्तु प्यार से उसे म...

राजमाता जीजाबाई

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राजमाता जीजाबाई ~~~~~~~~~~ जीजाबाई (1594-1674) महान मराठा शासक और योद्धा शिवाजी की माताजी थी। शिवाजी मुगल साम्राज्य के खिलाफ मजबूती से लड़े और हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की। जीजाबाई का जन्म 1594 में महाराष्ट्र के एक गांव सिंधखेड़ में हुआ था। उनके पिता शाही दरबारी और प्रमुख मराठा सरदार थे, जिनका नाम लखुजी जाधवराव था, जबकि उनकी माता का नाम म्हालसा बाई था। उनके पिता अहमदनगर में निजामशाही की सेवा करते थे और उन्हें अपने ऊंचे रुतबे और पद पर गर्व था। जीजाबाई की शादी बहुत कम उम्र में हो गई थी। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ उस कालखंड के रीति-रिवाज के मुताबिक उनका विवाह शाहजी भोसले से हुआ। शाहजी भी निजाम शाह के दरबार में राजनयिक पद संभालते थे। वे एक बेहतरीन योद्धा भी थे। शाहजी भोसले के पिताजी का नाम मालोजी शिलेदार था, जो बाद में तरक्की पाते हुए ‘सरदार मालोजी राव भोसले’ बन गए। वैसे तो दंपती का वैवाहिक जीवन बेहद सुखद था। लेकिन उनके परिजनों की आपसी टकराहट ने तनाव को जन्म दिया। शाहजी राजे और उनके ससुर जाधव के आपसी रिश्ते बिगड़ गए। हालात इतने बिगड़ चुके थे कि जीजाबाई पूरी तरह टूट गई थी। ...