प्रकृति और परमात्मा के पास रहें सदैव सुखी रहें।
🙏🙏
★आओ कुछ अच्छी बातें करें★
दोस्तों, जब भी मुझे, कोई भी अच्छी बात, सोशल मीडिया या प्रिंट मीडिया पर पढ़ने को मिलती हैं, तो वो मैं कॉपी-पेस्ट-एडिट करके आप सब तक ★आओ कुछ अच्छी बातें करें★ के तहत शेयर जरूर करती हूँ। आज भी "कल अचानक से तेज आँधी-पानी और बे-मौसम वर्षा, ओला वृष्टि, प्राकृतिक आपदा के बारे में कुछ रोचक जानकारी" विषय पर कुछ अच्छी बातें आपसे शेयर कर रही हूँ, इस प्राथना के साथ कि अगर आपको भी ये बातें अच्छी लगें, तो कृपया दूसरों के लिए, आगे ज़रूर शेयर करे ........
........विजेता मलिक
प्रकृति और परमात्मा के पास रहें सदैव सुखी रहें
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
🙏
कल अचानक से तेज आँधी-पानी और बे-मौसम वर्षा, ओला वृष्टि, प्राकृतिक आपदा से सम्पूर्ण विश्व चिन्तित है और सभी अपने-अपने आस्था के अनुसार प्रार्थना कर रहे हैं। परन्तु एक समग्र दृष्टि डालने पर लगता है कि मनुष्य दया का अधिकारी नही है। अपने सुख के लिये कौन सा पाप नही किया, फिर भी परमात्मा से अभय दान चाहता है। हम तीन घटना का उदाहरण आपके सामने रख रहे हैं...
१-ऑस्ट्रेलिया में अभी आठ महीने पहले ही 100 करोड़ जानवर आग में जल कर मरे थे और बगल में ही पानी से भरा समुद्र था लेकिन दुनियां में 190 देश हैं और आग बुझाने में सक्षम भी थे लेकिन किसी भी देश ने जंगल में लगी आग से जानवरों को बचाने का प्रयास नही किया और जिस देश में आग लगी थी वो देश ऑस्ट्रेलिया ने भी आग बुझाने का कोई प्रयास नही किया और जानवर आग में जल कर मरते रहे फिर ईश्वर ने खुद बेमौसम बारिश कर के आग को बुझाया और कुछ जानवर बच सके उसके बाद ही दुनियां में ये कोरोना वायरस ने दस्तक दी है क्यों की 29 दिसंबर 2019 को इस वायरस का पहला केस दुनियां में आया था और और ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में आग सितंबर 2019 से लगी थी 4 महीने से जानवरों की मौत झुलसने से हुई है। इसमें स्तनधारी पशु, पक्षी और रेंगने वाले जीव सभी शामिल हैं ये जानवर तड़प तड़प कर मर रहे थे और किसने भी उनको बचाने का प्रयास नही किया खुद ईश्वर ने बारिश कर के अपने बच्चों को बचाया है और इंसान भी इन जानवरों को बचाने में सक्षम था लेकिन लेकिन अपने स्वार्थ में व्यस्त था इस लिए उन जानवरों के श्राप से ये कोरोना वायरस आया होगा।
२-सम्पूर्ण उत्तराखंड की देव भूमि को चाहे वहाँ किसी भी राजनीतिक दल की सरकारें हों सबने भोग भूमि में बदलने में कोई कसर नही छोड़ी। माँ गंगा को बाँधों के बन्धन में डालने से लेकर हर छोटी-बड़ी नदी पर पावर प्रोजेक्ट लगाने के अलावा सम्पूर्ण तीर्थक्षेत्र की मर्यादा नष्ट कर दिया। हरियाणा, पंजाब, दिल्ली के पैसे वालों की लम्बी-लम्बी गाड़ियों में भरे हुए शराब की बोतलें, विषकन्याएँ और माँस के पैकेट ने बाबाकेदारनाथ,भगवान बदरी विशाल को दुःखी कर दिया। गंगोत्री और यमुनोत्री का अपमान असह्य वेदना के कारण नदियों का अपना कष्ट था। सबने मिलकर माँ अलकनन्दा के नेतृत्व में ऐसा भयानक दृश्य उत्पन्न किया कि चीत्कार और लाशों को कोई गिनने वाला नही था। टूटती गाड़ियों से निकलकर बहते शराब के बोतल और लाशें यही कहानी थी सन २०१३ के १५/१६ जून की, आज तक मृतकों का हिसाब नही हो पाया। कई राज्यों में ना लौट सके तीर्थ यात्रियों का मृत्यु-प्रमाणपत्र आज तक नही बन सका।
३-नेपाल में पशुपतिनाथ मन्दिर के एक किलोमीटर के रेंज में बने होटलों में देह व्यापार का बड़ा केन्द्र विकसित हो गया था। नेपाल के वामपंथी सनातन हिन्दू धर्म-द्रोही सरकारों के संरक्षण में जुआ, वेश्यावृत्ति, अपराध, मांसाहार ने तीर्थ क्षेत्र की मर्यादा को नष्ट कर दिया था। फिर बाबा पशुपतिनाथ जी ने अपने तरीक़े से २५अप्रैल २०१५ को अपराह्न ११:५६बजे भूकम्प के द्वारा सारी गन्दगी साफ़ कर दी। ज़ाहिर है नेपाल आजतक उससे उबर नही पाया हैं।
हम जब प्रकृति और परमात्मा को खिलौना समझते हैं तो कभी-कभी भगवान भी अपनी सत्ता का अनुभव कराते हैं। प्रकृति और परमात्मा के पास रहें सदैव सुखी रहें।
स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती
अखिल भारतीय सन्त समिति
🙏🙏