हिन्दू सम्मेलन : हिन्दू समाज को जागृत करने का स्तुत्य प्रयास
*हिन्दू सम्मेलन :
हिन्दू समाज को जागृत करने का स्तुत्य प्रयास*
हिन्दूओं के जनजागरण के उपलक्ष्य में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों की एक कड़ी हिन्दू सम्मेलन है। देश भर में हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है । हिन्दू सम्मेलन आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य हिन्दू समाज में एकता को बढ़ावा देना, सामाजिक समरसता का विकास करना, सांस्कृतिक संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाना और राष्ट्र के प्रति योगदान पर जोर देना है, जिसमें भेदभाव मिटाने, आपसी समझ बढ़ाने और सनातन संस्कृति को विश्व में एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत करने का स्तुत्य प्रयास है।
जैसा कि वक्ताओं के भाषणों से पता चलता है कि समाज में महत्वपूर्ण बदलाव लाने के लिए पांच परिवर्तन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जिसमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन तथा नागरिक कर्तव्यों का पालन सुनिश्चित करना और स्व अर्थात् स्वदेशी की अवधारणा को मजबूत करते हुए वसुधैव कुटुंबकम अर्थात इस वसुधा पर निवास करने वाले सभी व्यक्ति एक ही कुटुंब के सदस्य हैं, इस पवित्र भावना को विकसित करना है। स्वदेशी की अवधारणा को मजबूत करने की दिशा में अपनी मातृभाषा, अपनी वेशभूषा के साथ-साथ विभिन्न स्थानों पर भ्रमण करके देश की संस्कृति को पहचानना तथा भारतीय भोजन व्यवस्था के अनुरूप भोजन करना, इसमें शामिल है।
हिन्दू , वास्तव में कोई धर्म नहीं, अपितु यह भारतीय जीवन शैली है, जिसे विभिन्न पंथों को मानने वाले भारतवासी लोग अपना चुके हैं।
हिन्दू सम्मेलन में ऊंच - नीच, जाति - पाती व बड़े- छोटे का भेदभाव भुलाकर सभी हिन्दू समाजजन एक साथ बैठकर भोजन प्रसादी ग्रहण करेंगे। इससे भाईचारा और बंधुत्व की भावना का विकास अवश्य होगा। इसी से भारत राष्ट्र मजबूत होगा और इससे देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने में भी बहुत मदद मिलेगी। स्वदेशी की भावना का विकास होने से हमारे देश की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी।
एकता लोगों के बीच की दीवारों को तोड़ती है और पुलों का निर्माण करती है, जिससे एक ऐसा वातावरण बनता है जहाँ भाईचारा स्वाभाविक रूप से पनप सकता है।
सभी देशवासियों को हिन्दू सम्मेलनों की बहुत-बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं।
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