बाल गंगाधर तिलक जी द्वारा केसरी समाचार पत्र का प्रकाशन

बाल गंगाधर तिलक जी द्वारा केसरी समाचार पत्र का प्रकाशन 
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4 जनवरी / इतिहास स्मृति 

लोकमान्य तिलक जी ने इंग्लिश मे मराठा व मराठी में केसरी नाम से दो दैनिक समाचार पत्र शुरू किये जो जनता में बहुत ही लोकप्रिय हुए। लोकमान्य तिलक जी ने अंग्रेजी शासन की क्रूरता और भारतीय संस्कृति के प्रति हीन भावना की बहुत आलोचना की। उन्होंने माँग की कि ब्रिटिश सरकार तुरन्त भारतीयों को पूर्ण स्वराज दे। केसरी में छपने वाले उनके लेखों की वजह से उन्हें कई बार जेल भेजा गया।

केसरी (अर्थ: शेर), मराठी भाषा का एक समाचारपत्र है, जिसकी स्थापना 4 जनवरी 1881 में की थी। इस पत्र का उपयोग भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को वाणी देने के लिये किया गया था। यह समाचारपत्र आज भी तिलक जी के वंशजों एवं केसरी महरट्टा ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित होता है। केसरी में "देश का दुर्भाग्य" नामक शीर्षक से एक लेख छपा था, जिसमें ब्रिटिश सरकार की नीतियों का विरोध किया किया गया था I परिणाम स्वरूप बाल गंगाधर तिलक जी को 6 वर्ष के कठोर कारावास के अंतर्गत बर्मा के मांडले जेल में बंद कर दिया गया। कारावास के दौरान तिलक जी ने "आर्कटिक होम आफ द वेदाज" तथा "गीता रहस्य" नामक ग्रंथ की रचना की। तिलक जी को भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए के अंतर्गत राजद्रोह के अभियोग में 27 जुलाई 1897 को गिरफ्तार कर लिया गया । 

1870 में ब्रिटिश सरकार ने भारतीय दंड संहिता में धारा 124-ए जोड़ा जिसके अंतर्गत "भारत में विधि द्वारा स्थापित ब्रिटिश सरकार के प्रति विरोध की भावना भड़काने वाले व्यक्ति को 3 साल की कैद से लेकर आजीवन देश निकाला तक की सजा दिए जाने का प्रावधान था।

इस लेख से हमारी नौजवान पीढ़ी को यह समझना चाहिए की आजादी यूं ही नहीं मिल गई थी। इस आजादी को पाने के लिए बाल गंगाधर तिलक जी जैसे महान क्रांतिकारियों का कड़ा संघर्ष शामिल था।

जय हिन्द ।
🙏🙏
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