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Showing posts from December, 2025

वीर बाल दिवस

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वीर बाल दिवस  ~~~~~~~~ 26 दिसम्बर घोषित किया गया है।  सिखों के दसवें गुरु गोविन्द सिंह जी के दोनो छोटे साहबजादे फतह सिंह और जोरावर सिंह और गुरुजी की माता गुजरी देवी जी की शहादत दिवस को ही अब "वीर बाल दिवस" के रूप में मनाया जायेगा।  यही हम सबकी उनकी शहादत को सच्ची श्रद्धांजलि होगी......  जोरावर जोर से बोला  फतेह सिंह शेर सा बोला  रखो ईंटे भरो गारे  चुनों दीवार हत्यारें  निकलती सांस बोलेगी  हमारी लाश बोलेगी  यही दीवार बोलेगी  हजारो बार बोलेगी  हमारे देश की जय हो  हमारे धर्म की जय हो  गुरुग्रंथ की जय हो पितादशमेश की जय हो।  साहिब श्री गोबिंद सिंह जी के साहिबजादे फतेहसिंह जी व जोरावरसिंह जी के शहीदी दिवस पर उन्हें कोटि कोटि प्रणाम!  साहिबजादो के बलिदान का दिवस : वीर बाल दिवस  ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 20 से 27 दिसम्बर का वह सप्ताह, जब गुरुगोविंद सिंह के परिवार ने राष्ट्र के लिए सर्वस्व समर्पित किया ......  "चार साहिबज़ादे "  शब्द का प्रयोग सिखों के दशम गुरु श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी ...

शहीद उधम सिंह जी

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शहीद उधम सिंह जी ~~~~~~~~~~~ शहीद उधम सिंह Udham Singh एक राष्ट्रवादी भारतीय क्रन्तिकारी थे जिनका जन्म शेर सिंह के नाम से 26 दिसम्बर 1899 को सुनम, पटियाला, में हुआ था। उनके पिता का नाम टहल सिंह था और वे पास के एक गाँव उपल्ल रेलवे क्रासिंग के चौकीदार थे। सात वर्ष की आयु में उन्होंने अपने माता पिता को खो दिया जिसके कारण उन्होंने अपना बाद का जीवन अपने बड़े भाई मुक्ता सिंह के साथ 24 अक्टूबर 1907 से केंद्रीय खालसा अनाथालय Central Khalsa Orphanage में जीवन व्यतीत किया। दोनों भाईयों को सिख समुदाय के संस्कार मिले अनाथालय में जिसके कारण उनके नए नाम रखे गए। शेर सिंह का नाम रखा गया उधम सिंह और मुक्त सिंह का नाम रखा गया साधू सिंह। साल 1917 में उधम सिंह के बड़े भाई का देहांत हो गया और वे अकेले पड़ गए। उधम सिंह के क्रन्तिकारी जीवन की शुरुवात ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ उधम सिंह ने अनाथालय 1918 को अपनी मेट्रिक की पढाई के बाद छोड़ दिया। वो 13 अप्रैल 1919 को, उस जलिवाला बाग़ हत्याकांड के दिल दहका देने वाले बैसाखी के दिन में वहीँ मजूद थे। उसी समय General Reginald Edward Harry Dyer ने बाग़ के एक दरवाज़ा...

केदार नाथ व्यास जी

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इनका नाम है केदार नाथ व्यास। अगर आज हिंदुओं को ज्ञानवापी मंदिर में पूजा करने का अवसर मिलता है तो यह केवल उनके और उनके परिवार के कारण है। ज्ञानवापी मंदिर में 4 तहखाना हैं, हाल ही में कोर्ट ने एक तहखाना में हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत दे दी, उस तहखाना को व्यास जी का तहखाना कहा जाता है। उनका परिवार 1580 से वास्तविक काशी विश्वनाथ की पूजा करता आ रहा है। उन्होंने 1880 में मामला दायर किया और 1937 में जीत हासिल की। 1947 में मुस्लिमों ने उस स्थान पर कब्ज़ा करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने मुस्लिमों से युद्ध किया और उन्हें कब्ज़ा नहीं करने दिया। वे 1993 तक वहां पूजा करते रहे। 1993 में समाजवादी पार्टी से मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने वहां पूजा बंद करा दी। यह मामला उनके परिवार के सदस्यों द्वारा दायर किया गया था और पूजा की अनुमति मांगी गई थी। 2020 में श्री केदारनाथ जी व्यास हमेशा के लिए इस दुनिया से चले गये। 1947 में भारत को आजादी मिल गई लेकिन हिंदू को नहीं मिली। लड़ाई अभी भी जारी है। बहुत सारी अनकही कहानियाँ हैं.. बहुत सारे गुमनाम हीरो हैं... "भारत सर्वोपरि" 💪💪 ...